कोरोना के नए वेरिएंट को पहचान नहीं पाए भारतीय वैज्ञानिक, अब सता रहा है इस बात डर

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नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर भारत में डराने वाली है। लगातार संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं और नए रिकॉर्ड दर्ज हो रहे हैं। कोरोना की बढ़ते मामलों के पिछले वजह है संक्रमण के नए और भिन्न-भिन्न वेरिएंट, जिसे पहचाना काफी मुश्किल है। यही वजह है कि देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पहले से कई गुणा ज्यादा तेज हो चुकी है। वैज्ञानिकों को इस बात का चिंता है कि संक्रमण के नए वेरिएंट से कहीं वैक्सीन का असर भी प्रभावित न हो। अगर ऐसा हो जाता है तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं।

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सरकारी डेटा से अनुसार, कोरोना पॉजिटिव सैंपलों में से सिर्फ 1 फीसदी को ही जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है। तो वहीं ब्रिटेन में 8 प्रतिशत सैंपलों की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है। पिछले हफ्ते ही ब्रिटेन में 33 प्रतिशत सैंपलों को सिक्वेंस किया गया है। जबकि अमेरिका में एक हफ्ते में आए कुल ममलों में से चार प्रतिशत सैंपलों की जांच कराई गई है। भारत में पिछले 24 घंटे में 1 लाख 15 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। देश में अब तक संक्रमण के 1.28 करोड़ मामले सामने आ चुके हैं।

भारत सिर्फ अमेरिका और ब्राजील से ही पीछे हैं। अगर इस रफ्तार से ही संक्रमण के मामले आने लगे तो अगले कुछ दिनों में भारत ब्राजील को पीछे छोड़ देगा। देश में कोरोना संक्रमण का केंद्र महाराष्ट्र बन चुका राज्य है। प्रदेश जिस गति से मामले बढ़ रहे हैं, उसने कई देशों को पीछे छोड़ दिया है।

यूके वेरिएंट अमेरिका में तभी मचाई हुई है। वहीं अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना है कि पंजाब में मिले कोरोना के नए मामलों में 80 प्रतिशत मामलों में यूके वेरिएंट मिला है। इसकी पुष्टि जीनोम सिक्वेंसिंग से ही हुई है। किसान आंदोलन, स्थानीय निकाय चुनावों और शादियों की वजह से नया यूके वेरिएंट तेजी से फैल रहा है।

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