दाने-दाने को मोहताज हुआ पूर्व रॉ एजेंट, मदद के लिए लगा रहा डीएम ऑफिस के चक्कर

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लखनऊ। एक सीक्रेट एजेंट की जिंदगी के बारे में जब फिल्मों में दिखाया जाता है तो उसकी लाइफ काफी ऐशो आराम की दिखाई जाती है। बड़ी गाड़ियां और बड़े होटल और खूब पैसा। ऐसी फिल्मों को देखकर आम आदमी को भी यही लगता है कि, सीक्रेट एजेंट लाइफ में काफी खतरा तो होता है ही, लेकिन लाइफ आसान होती है। सलमान खान की एक फिल्म आई थी एक था टाइगर, जिसे देख लोग काफी खुश थे। रील लाइफ की टाइगर की तारीफ सबने की लेकिन रियल लाइफ का टाइगर आज जिंदा तो है लेकिन दाने-दाने के खाने का मोहताज हो चुका है। फिल्म में दिखाया गया था कि, सलमान काफी लंबे समय तक अन्य देशों में छुपकर रहते हैं और रॉ उन्हें किसी तरह की मदद भी नहीं कर रहा होता है।

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वहीं अपने ही देश में राजधानी दिल्ली से चंद किलोमीटर दूर नजीबाबाद में रहने वाले मनोज रंजन दीक्षित आज अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं। डीएम ऑफिस में जब पूर्व रॉ एजेंट ने अपने बारे में बताया कि, उनके पास रहने के लिए आज छत तक नहीं है तो ऑफिस अधिकारी मनोज रंजन दीक्षित चेहरा देखते रह गए, लेकिन डीएम से मुलाकात न होने की वजह से उनकी कोई मदद वहां भी हो नहीं पाई। उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

मनोज पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्हें 2005 में बाघा बॉर्डर पर छोड़ा गया था। पाकिस्तान से वापस आने के बाद उनकी शादी 2007 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही 2013 में उनकी पत्नी की मौत कैंसर की वजह से हो गई थी। पिछले काफी समय से पूर्व रॉ एजेंट लखनऊ में ही रह रहे हैं। वो गोमती नगर विस्तार में स्टोर पर नौकरी करते थे, लेकिन लॉकडाउन में वो भी उनके हाथ से चली गई।

पाकिस्तान में मनोज काफी समय तक नाम बदल बदलकर रहे, लेकिन उन्हें 1992 में अफगानिस्तान बॉर्डर पर हिरासत में ले लिया गया। उन्हें लंबे समय तक दुश्मन देश में परेशान किया गया। उन्हें कराची जेल में काफी टॉर्चर किया गया लेकिन उन्होंने देश से जुड़े राज कभी किसी को नहीं बताए। 56 वर्ष के पूर्व रॉ एजेंट को उम्र के इस पड़ाव में सरकार से मदद चाहिए।

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