बापू की हत्या से जुड़े दस्तावेज पीएम मोदी ने अगर नष्ट करवा दिए हैं तो कभी सामने नहीं आ पाएंगे असली गुनहगार

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नई दिल्ली। देश आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि माना रहा है। 30 जनवरी 1948 में महात्मा गांधी कर दी गई थी। राष्ट्रपिता की हत्या को आज 73 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन फिर भी ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब आज तक सामने नहीं आ पाए हैं। जांच के दौरान कुछ पहलुओं पर तो गौर ही नहीं किया गया। कुछ तस्वीरें और तथ्य गलत पेश किये गए, जिससे आज सच्चाई से पूरी तरह से पर्दा उठ नहीं पाया है। राष्ट्रपिता की हत्या में हिंदू महासभा और विनायक सावरकर में मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। हत्या की जांच में कहीं भी आरएसएस का जिक्र तक नहीं है। इसकी वजह से ही सावरकर को कोर्ट ने सबूतों के आभाव में बरी कर दिया था।

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महात्मा गांधी की हत्या की जांच के लिए वर्ष 1966 में एक जांच आयोग का गठन हुआ था, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस जीवनलाल कपूर ने की थी। आयोग ने माना था कि, जांच ठीक से नहीं हुई थी, जिसकी वजह से ही राष्ट्रपिता की हत्या की गुत्थी अनसुलझी रह गई थी। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने राष्ट्रपिता की हत्या साजिश को लेकर एक किताब ‘लेट्स किल गांधी’ लिखी थी। किताब को लेकर चर्चा में आए तुषार गांधी का कहना है कि, बापू की हत्या को लेकर हुई जांच में कई कमियां रही हैं। उनकी हत्या की जांच जैसे होनी चाहिए थी वैसे हुई नहीं।

ये जांच दोबारा फिर होनी चाहिए। वो भी एक दम नए सिरे से, लेकिन सच यही है कि, अब सबूत नहीं मिल सकते हैं क्योंकि एक लंबा वक़्त बीत चुका है। बापू की जब हत्या हुई तो उस समय सरकार और प्रशासन के मध्य तालमेल ठीक नहीं था। वहीं जांच में कई पहलुओं पर तो किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। महात्मा गांधी की हत्या के मामले में दाखिल किये गए आरोपपत्र में 9 आरोपियों के आलावा तीन ऐसे नाम भी शामिल थे। जिस पर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।

इन नामों में सूर्यदेव शर्मा, गंगाधर जाधव और गंगाधर दंडवते थे, जिनकी भूमिका की तो जांच ही नहीं हुई। तुषार गांधी का कहना है कि, आज की मौजूदा केंद्र सरकार के पास अगर बापू की हत्या से सम्बंधित कोई ऐसी जानकारी होती तो नेहरू पर सवाल उठा सके। तो अब तक कई सवाल उठ चुके होते। पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद कई बार अभिलेखागार का दौरा किया। यही वजह है कि, पिछले 6 वर्षों में कोई भी सत्ता पक्ष का नेता इसे लेकर कुछ नहीं बोला है।

बापू की हत्या में कई संगठनों की मिलीभगत थी। वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी पीएम बने तो उन्होंने इस मामले से जुड़े कई जरुरी दस्तावेज बेकार बताकर नष्ट करवा दिए। ये कौन से दस्तावेज है इसकी जानकारी अब तक सामने नहीं आ पाई है। अगर ये महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े सबूत थे तो अब कभी भी बापू के हत्यारों को लेकर सच्चाई सामने नहीं आ पायेगी।

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