सलमान को हो सकती है सात साल की सजा! इस मामले में दिया था झूठा हलफनामा

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salman khan

राजस्थान। वर्ष 1998 में फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान जोधपुर में काले हिरन के शिकार मामले में फंसे सलमान खान (Salman Khan) पर तब आर्म्स एक्ट का भी केस दर्ज हुआ था। उस दौरान सलमान खान (Salman Khan) ने कोर्ट को हलफनामा देकर यह बताया था कि उनका लाइसेंस कहीं खो गया है, लेकिन अब 18 साल बाद इस बात का खुलासा हो रहा है कि उन्होंने कोर्ट को झूठा हलफनामा दिया था। दरअसल उनका लाइसेंस गुम नहीं हुआ था बल्कि उन्होंने खुद उसे रिन्यू करने के लिए दिया था।

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इस मामले में गत नौ फरवरी को जोधपुर कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई के दौरान पता चला कि आर्म्स एक्ट मामले में सलमान खान (Salman Khan) द्वारा 2003 में दिया गया लाइसेंस गुम होने का शपथ पत्र अब 18 साल बाद झूठा निकला। अब कोर्ट इस मामले में 11 फरवरी को फैसला सुनाएगा। बता दें कि कोर्ट में झूठे शपथ पत्र पेश करना या झूठी गवाही देने के मामले में अधिकतम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है। अब सरकार ने इस मामले में न्यायलय में प्रार्थना पत्र देते हुए सलमान के खिलाफ आईपीसी की धारा 193 के तहत एक और मुकदमा चलाने की मांग की है।

नौ फरवरी को हुई सुनवाई

नौ फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान सलमान खान (Salman Khan) की तरफ से उनकी वकील हस्तीमल सारस्वत ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने सलमान खान द्वारा 2003 में दिए गए झूठे हलफनामे को स्वीकार करते हुए कहा कि उनसे यह भूल अनजाने में हुई है। चूंकि वह बॉलीवुड के बड़े सितारे हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं, जिसके चलते उनसे यह गलती हुई। उन्हें याद नहीं था कि उन्होंने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए दिया था।

काला हिरन मारने का मामला 

गौरतलब है कि वर्ष 1998 में काला हिरन मारने के केस में जब अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) से उनका लाइसेंस मांगा गया था तब उन्होंने कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा था कि उनका लाइसेंस कहीं खो गया है ,लेकिन अब कोर्ट ने ये पाया कि सलमान का लाइसेंस कहीं गुम नहीं हुआ था बल्कि उन्होंने खुद उसे रिन्यू कराने के लिए हथियार लाइसेंस नवीनीकरण शाखा में पेश किया था।

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