Birthday special : हैट्रिक लेने वाले भारतीय स्पिनर बनना चाहते थे ट्रक ड्राइवर,फिर हुआ चमत्कार…

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Truck Driver

अपनी जबरदस्त बॉलिंग से सबसे स्ट्रांग टीम ऑस्ट्रेलिया को खौफ से भर दिया था। ऐसा कहा गया है कि भारतीय टीम के जबरदस्त बॉलर हरभजन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाज रिकी पोंटिंग को नाकों चने चबा दिए थे। वह हरभजन सिंह भी हैं, जिन्होंने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में पहली हैट्रिक अपने नाम करने का कारनामा किया। हरभजन सिंह आज हम सबके बीच अपना 41 वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं।

3 जुलाई 1980 को जालंधर में हरभजन सिंह का जन्म हुआ था उन्होंने भारत की टीम के लिए 103 टेस्ट 236 वनडे और 28 टी20 मैच खेले। हरभजन सिंह के नाम 417 टेस्ट विकेट है। वह वनडे में 269 शिकार कर चुके हैं। इंटरनेशनल T20 में हरभजन सिंह ने अपने जबरदस्त बॉलिंग करके 25 विकेट अपने नाम किए। हरभजन सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि वह 2007 में T20 वर्ल्ड कप और 2011 में वर्ल्ड कप जीत चुके हैं लेकिन क्या आपको पता है कि स्पिनर हरभजन सिंह आज जिस मंजिल में है वह क्या उनका सपना था।

आपको बता दें कि हरभजन सिंह क्रिकेट छोड़कर ट्रक ड्राइवर बनने का फैसला ले लिया था साल 1998 में टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले हरभजन सिंह को डेढ़ साल के बाद ही बाहर कर दिया गया था। उस समय भारतीय टीम के स्टार अनिल कुंबले थे और उनकी गैरमौजूदगी में ही दूसरे स्पिनर्स को अवसर मिल रहा था। चांस ना मिलने की वजह से हरभजन सिंह निराश हो गए थे। वही दौर था जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था।

साल 2000 में हरभजन सिंह के पिता का निधन हो गया और इसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। तब वह मात्र 21 साल के थे हरभजन सिंह को अपनी मां और पांच बहनों को पाना था और ना तो उनके पास कोई नौकरी थी और ना ही टीम इंडिया में खेलने का अवसर था।

बनना चाहते थे ट्रक ड्राइवर

अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए हरभजन सिंह ने क्रिकेट छोड़ ट्रक ड्राइवर बनने का फैसला किया वह कनाडा जाकर ट्रक चलाना चाहते थे। हालांकि हरभजन सिंह को ऐसा करने से किसी और ने नहीं, बल्कि उनकी बहनों ने रोका। उन्हें परिवार ने क्रिकेट पर और मेहनत करने की एडवाइस थी। जिसके बाद हुआ चमत्कार। हरभजन सिंह ने साल 2000 रणजी ट्रॉफी में कमाल का प्रदर्शन करते हुए 5 मैचों में महज 13.96 की औसत से 28 विकेट हासिल किए। इसी के बाद हरभजन सिंह का जादू चला। उन्होंने 2001 में भारतीय टीम में वापसी की और फिर उन्होंने इतिहास रच दिया।

ऑस्ट्रेलिया पर बरसा भज्जी का कहर

आपको बता दें कि 2001 में ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत दौरे पर आई और टेस्ट सीरीज में हरभजन सिंह ने कोहराम मचा दिया। अनिल कुंबले को चोट लगने की वजह से हरभजन सिंह को इस टीम में खेलने का मौका मिला। इंडिया टीम पहले ही टेस्ट मैच हार गई जिसमें उन्होंने चार विकेट हासिल किए अगले दो टेस्ट में हरभजन सिंह ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर जमकर बरसे हरभजन ने दूसरे टेस्ट में 13 और तीसरे टेस्ट में 15 विकेट चटकाए इस सीरीज में हरभजन सिंह ने 32 विकेट चटकाए और वह टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर भी बने। इस सीरीज में उन्हें टर्बोनेटर नाम मिला।

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