Six years of Demonetisation: बदलाव के 6 साल, नोटबंदी के बाद बैंक के बाहर लंबी कतारें भूल गए आप?

Six years of Demonetisation: आज इस नोट बंदी की डेट पर आपको इससे जुड़ी 5 खास बातें बताते हैं, जिन्होंने नोटबंदी के बाद इन 6 सालों में किस तरीके से बदलाव कर दिया है।

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Six years of Demonetisation: आज की तारीख तो आज सबको याद ही होगी। जी हां, आज है 8 नवंबर यह तारीख देश में एक बड़े फैसले को लेकर जानी जाती है। असल में, पीएम मोदी ने आज से 6 साल पहले 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान कर दिया था, जिसके बाद आधी रात से ही हड़बड़ाहट शुरू हो गई थी। सभी लोग अपने 500 और 1000 रुपए के नोटों को बदलने के लिए बेताब थे और इधर-उधर बैंक की लाइन में लगे हुए थे। सरकार के इस फैसले से देश में बहुत उथल-पुथल मच चुकी थी, लेकिन फिर नए नोट करेंसी मार्केट का भाग बन गए। आइए आज इस नोट बंदी की डेट पर आपको इससे जुड़ी 5 खास बातें बताते हैं, जिन्होंने नोटबंदी के बाद इन 6 सालों में किस तरीके से बदलाव कर दिया है।

ये रही खास 5 बातें

1- भले ही देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 500 और 1000 रुपए के नोट एकदम से चलन से बाहर हो गए। उनकी जगह पर 2000 के नोट, 500 के नोट और 200 के नोट ने जगह ली। शुरुआत में थोड़ा सा अटपटा लगा, लेकिन फिर धीरे-धीरे यह चलन बढ़ता चला गया। नोटबंदी के 6 साल के बाद भी देश में करण की नोटों के चलन में बहुतold note of 500 and 1000 तेजी देखने को मिली अब देश में कैश का सर्कुलेशन करीबन 72% बढ़ गया है। फिलहाल नोटबंदी जैसे फैसलों से लोगों को जो झटका लगा उससे उबरने में डिजिटल पेमेंट या कैशलेस पेमेंट का भी बहुत स्थान रहा, जिसको कोरोना कॉल में और ज्यादा बढ़ावा मिला।

2- साल 2016 में नोटबंदी के बाद अगले महीने तक देश में बहुत अफरा-तफरी रही। लोगों को पुराने नोट जमा करने और नए नोट प्राप्त करने में काफी लाइनों में भी लगना पड़ा। ऐसे भी कहा गया है कि सरकार के इस फैसले के बाद काला धन खत्म हो गया और नगदी का चलन ही कम हो गया। इसका कारण यह था कि सर्कुलेशन में सबसे अहम रोलold note of 500 and 1000 किए गए। 500 और 1000 रुपए के नोट का था। नोट बंदी की घोषणा के बाद बहुत से मामले सामने आए। करोड़ों की ऐसी राशि है, जिनमें चलन से बाहर किए गए नोट शामिल थे। कूड़े और नदी में बहते हुए दिखाई दिए।

3- नोटबंदी के बाद भले ही नकदी में कमी दिखाई दी। 4 नवंबर 2016 को देश में करेंसी नोटों का सर्कुलेशन 17.97 लाख करोड रुपए के लेवल पर चल रहा था। नोटबंदी के बाद 25 नवंबर 2016 को यह 9.11 लाख करोड़ रुपए पर आold note of 500 and 1000 गया। नवंबर साल 2016 में 500 और ₹1000 के नोट वापस लेने के बाद लोगों के पास जो करेंसी थी। वह 4 नवंबर 2016 को 17.95 लाख करोड़ रुपए प्रति जो कि कम होकर साल 2017 जनवरी में ₹80 लाख करोड़ पर आ गई।

4- भले ही अब डिजिटल भुगतान देश में बढ़ गया है, लेकिन खरीदारी के लिए आप भी नगदी को ज्यादा ही तवज्जोold note of 500 and 1000 मिलती है। नोटबंदी से करीब 2 सप्ताह बाद 25 नवंबर 2016 को जहां देश के लोगों के पास 9.11 लाख करोड़ रुपए की नगदी मौजूद थी। इसमें अभी तक 239 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

5- नोटबंदी वाले साल ही यूपीआई की शुरुआत हो गई। साल 2016 से लोगों के फोन में यूपीआई आ गया। देश में कैश सर्कुलेशन के साथ ही डिजिटल पेमेंट भी बहुत तेजी से बढ़ी। फिलहाल देश में डिजिटल पेमेंट के बहुत के विकल्प अबold note of 500 and 1000 लोगों के पास है। खबरों के अनुसार नोटबंदी के फैसले के तुरंत बाद ही क्रेडिट डेबिट कार्ड नेट बैंकिंग यूनिफाइड पेमेंट इंटर से सभी तरीके डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला।

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