वास्तु शास्त्र: जानें कौन सी दिशा, कैसे करती है आपके जीवन को प्रभावित

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वास्तु विज्ञान में सभी दिखाओं ऊर्जा का उल्लेख है। घर में आपको संतुलित ऊर्जा आपको मिल रही है तो सुख शांति बनी रहेगी। वहीं वास्तु में किसी भी तरह का दोष होने पर कोई न कोई परेशानी आपके जीवन में बनी रहेगी। घर का निर्माण करवाते वक़्त वास्तु के नियमों का जरूर ध्यान रखें। वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का महत्व बताया गया है, इन सभी दिशाओं के स्वामी और तत्व भिन्न-भिन्न होते हैं। इन उपायों के द्वारा आप इन दिशाओं को संतुलित कर सकते हैं।

पश्चिम दिशा वायु तत्व का नेतृत्व करती है, जिसके स्वामी वरुण देव हैं। ये दिशा लाभ की है, जिसे बंद करना या फिर दूषित करने से जीवन ने निराशा आ जाती है। आय में भी रुकावट बढ़ती है, जिससे जीवन में तनाव भी बढ़ता है। पश्चिम के स्थान पर पूर्व दिशा में और दक्षिण के स्थान पर उत्तर दिशा में ज्यादा खुली और हल्की जगह होनी चाहिए।

उत्तर दिशा जल तत्व का नेतृत्व करती है। इस दिशा को मातृ भाव से जुड़ा माना गया है, जिसके स्वामी कुबेर हैं। इस दिशा का बंद होना या फिर दूषित होने से शिक्षा और जीवन में उन्नति के मार्ग बाधित होने लगते हैं। इस दिशा खुला,साफ़ और हल्का रखें।

दक्षिण दिशा के स्वामी यम हैं। इस दिशा को हल्का और खुला रखना दोषपूर्ण हैं। इस दिशा में खिड़कियां और दरवाजे न रखें। इससे रोग होने और मानसिक अस्थिरता की परेशानी बनी रहती है। व्यक्ति के फैसले लेने की क्षमता में कमी आती है। इस दिशा में घर में भारी निर्माण करना शुभ माना गया है। इससे परिवार के सदस्यों की हेल्थ अच्छी बनी रहती है।

उत्तर-पूर्व दिशा को वास्तु शास्त्र में ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिशा में पूजा घर होने बेहद शुभ है। इस दिशा में गलती से भी शौचलय न बनाएं। इससे आपको अनेक मानसिक परेशानियां घेर सकती हैं।

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