अक्षय तृतीया: इस बार बन रहे हैं कई विशेष योग, इन उपायों से करें लक्ष्मी की पूजा, घर में आयेगी सुख संपन्नता

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अक्षय तृतीया

जयपुर। इस साल अक्षय तृतीया 14 मई को पड़ रही है। हिन्दू धर्म में इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है। लोग इस सोने चांदी के आभूषण खरीदते हैं और माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करते हैं। ज्योतिश्चार्यों के अनुसार वैशाख मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है की अक्षय तृतीया के ही दिन भगवान परशुराम ने अवतार लिया था। इसके साथ ही इसी दिन 10 महाविद्या की देवी भगवती मातंगी का भी प्राकट्य महोत्सव मनाया जाता है।मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन अन्न का दान करने से घर में सुख शांति समृद्धि का वास होता है। घर में माता लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह के अबूझ मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।

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ज्योतिषाचार्य बताते है कि इस बार अक्षय तृतीया का पर्व 14 मई को मनाया जायेगा। इस दिन शुक्रवार रोहिणी नक्षत्र सुकर्म योग तेती करण मिथुन राशि में चंद्रमा रहेगा मध्य रात्रि पूर्व 23 25 पर सूर्य ग्रह का वृषभ राशि में गोचर होगा। इसके बाद सूर्य उदय से राज योग रहेगा। ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन केसर और हल्दी से माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख संपन्नता का वास होता है। इस दिन लोगों को चाहिए कि वह सोने चांदी की खरीदी करे भगवान के लिए आभूषण बनवाए औंर उन्हें धारण कराएं। इस दिन मन्दिर में लक्ष्मी नारायण की चरण पादुका स्थापित कर नित्य उनकी पूजन करने से भी आर्थिक समस्या हल होती हैं और संपन्नता आने लगती है।

इन चीजों का करना चाहिए दान 

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इसी दिन मां भगवती मातङ्गी का प्राकट्य महोत्सव भी मनाया जाता है इसलिए भगवती की आवरण पूजन पुष्पार्चन वैदिक ब्राह्मणों द्वारा करवाना चाहिए। इससे घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियों दूर होने लगती है और सकारात्मकता का प्रवाह होता है। अक्षय तृतीया के दिन पितरों की प्रसन्नता के लिए जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा आदि फल, शक्कर, घी आदि ब्राह्मण को दान करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष कम होने लगता हैं और जातक पितृ देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन घर के मन्दिर में एकाक्षी नारियल स्थापित करें.साथ ही माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए 11 कोड़ी लाल वस्त्र में बांध कर रखें।

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