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राहु-केतु का अचानक शुरू हुआ प्रकोप ला सकता है बड़ा संकट, जानिए गोमेद और लहसुनिया रत्न कैसे रोकेंगे आने वाली अनहोनी!

क्या आपके बनते काम अचानक बिगड़ रहे हैं? जीवन में आई इस उथल-पुथल की वजह राहु-केतु हो सकते हैं।

राहु-केतु

कई बार हमारे जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा होता है, लेकिन अचानक से मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। नौकरी में दिक्कतें आने लगती हैं, व्यापार ठप होने लगता है और परिवार में बिना बात के क्लेश शुरू हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब आपके बने-बनाए काम आखिरी मौके पर आकर बिगड़ जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब जीवन में इस तरह की अप्रत्याशित और अचानक परेशानियां बढ़ने लगें, तो इसके पीछे राहु-केतु का हाथ हो सकता है। कुंडली में इन दोनों ग्रहों की स्थिति कमजोर या खराब होने पर इंसान का पूरा जीवन उथल-पुथल से भर जाता है। ऐसे में ज्योतिष विज्ञान में दो बेहद प्रभावशाली रत्नों, गोमेद और लहसुनिया, को इन क्रूर ग्रहों के बुरे प्रभाव को शांत करने के लिए अचूक उपाय माना गया है।

राहु के जाल से बचाएगा शहद जैसे रंग वाला गोमेद रत्न

राहु को ज्योतिष में एक छाया ग्रह माना गया है, जो इंसान की बुद्धि को भ्रमित करने के लिए जाना जाता है। जब राहु भारी होता है, तो व्यक्ति सही और गलत का अंतर नहीं कर पाता और मानसिक तनाव से घिर जाता है। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए गोमेद रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। हल्के भूरे या शहद जैसे रंग का यह रत्न राहु के नकारात्मक प्रभाव को तेजी से कम करता है। गोमेद पहनने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति में सही फैसले लेने का आत्मविश्वास भी जागृत होता है। अगर आपका पैसा लंबे समय से कहीं फंसा हुआ है या बिजनेस में लगातार घाटा हो रहा है, तो गोमेद पहनने से तरक्की के बंद रास्ते फिर से खुलने लगते हैं।

केतु के हर संकट को नाकाम करेगा बिल्ली की आंख जैसा लहसुनिया

राहु की तरह ही केतु भी इंसान के जीवन में अचानक से बड़ी दुर्घटनाएं, गुप्त शत्रु और गंभीर बीमारियां लेकर आता है। केतु के इस अनिष्ट प्रभाव से बचने के लिए लहसुनिया रत्न सबसे बड़ा सुरक्षा कवच माना जाता है। इसे अंग्रेजी में ‘कैट्स आई’ भी कहते हैं, क्योंकि इसके बीच में बिल्ली की आंख जैसी एक चमकदार पट्टी दिखाई देती है। लहसुनिया रत्न पहनने से व्यक्ति के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बन जाता है, जिससे अदृश्य बाधाएं और दुश्मनों की चालें नाकाम हो जाती हैं। यह रत्न मानसिक अशांति को दूर कर सेहत में धीरे-धीरे सुधार लाता है। जिन लोगों को अक्सर अज्ञात भय सताता है, उनके लिए लहसुनिया एक वरदान की तरह काम करता है।

सावधानी है जरूरी: बिना सही नियम और सलाह के पहुंच सकता है नुकसान

रत्न विज्ञान में गोमेद और लहसुनिया को बहुत उग्र और प्रभावशाली माना गया है, इसलिए इन्हें पहनने से पहले कुछ बेहद जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बिना सोचे-समझे या बिना कुंडली दिखाए इन रत्नों को धारण करने से फायदे की जगह बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली की जांच करवाएं। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, गोमेद रत्न को शनिवार के दिन पंचधातु या चांदी की अंगूठी में जड़वाकर सीधे हाथ की मध्यमा (बीच वाली) उंगली में पहनना चाहिए। वहीं, लहसुनिया रत्न को बुधवार, शुक्रवार या शनिवार के दिन धारण करना शुभ होता है। इन रत्नों को पहनने से पहले गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध कर लें और इनके संबंधित मंत्रों का जाप कर पूरी श्रद्धा के साथ धारण करें।

Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक वास्तु एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें और किसी भी प्रकार के निश्चित परिणाम या लाभ का दावा न मानें।

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