Home एस्ट्रो सावन के दूसरे सोमवार पर मंदिर जाने से पहले जान लें ये...

सावन के दूसरे सोमवार पर मंदिर जाने से पहले जान लें ये 7 गलतियां, पूजा के दौरान कहीं आप भी तो नहीं करते ये काम?

10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है। शिव पूजा के दौरान जलाभिषेक, बेलपत्र, परिक्रमा और मंदिर की स्वच्छता से जुड़ी 7 सामान्य गलतियों से बचें।

सावन

10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने मंदिर पहुंचेंगे। सोमवार के साथ सोम प्रदोष का संयोग भी बताया जा रहा है, इसलिए कई मंदिरों में सुबह से शाम तक भीड़ रहने की संभावना है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कई भक्त जल्दबाजी में बहुत तेज धार से पानी डालते हैं, जबकि पूजा में भाव और श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है। जल शांत तरीके से अर्पित किया जा सकता है और साथ में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है। इसी तरह दूध, दही या शहद से अभिषेक करने के बाद साफ जल अर्पित करना भी जरूरी माना जाता है। मंदिर की व्यवस्था को देखते हुए ही दूध या अन्य सामग्री का इस्तेमाल करें। ज्यादा मात्रा में सामग्री चढ़ाकर शिवलिंग या जलहरी पर उसे जमा छोड़ना स्वच्छता की दृष्टि से भी ठीक नहीं है।

बेलपत्र को लेकर भी भक्त करते हैं ये छोटी भूल

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का खास महत्व माना जाता है। आमतौर पर साफ और ताजा बेलपत्र अर्पित किया जाता है। भक्तों को बेलपत्र चढ़ाने से पहले यह देख लेना चाहिए कि पत्तियां गंदी, सड़ी या कीड़ों से खराब न हों। केवल संख्या पर ध्यान देने के बजाय पत्ते की स्वच्छता भी महत्वपूर्ण है। बेलपत्र उपलब्ध न हो तो केवल स्वच्छ जल से भी भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। इसी तरह हर फूल या पत्ती को शिव पूजा में चढ़ाना जरूरी नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और मंदिरों में पूजा सामग्री को लेकर परंपराएं अलग हो सकती हैं। खासतौर पर तुलसी और केतकी जैसे फूल-पत्तों को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं मिलती हैं। इसलिए किसी सोशल मीडिया पोस्ट को अंतिम नियम मानने के बजाय जिस मंदिर में पूजा कर रहे हैं, वहां की परंपरा और पुजारी के निर्देश का पालन करना बेहतर है।

शिवलिंग की परिक्रमा और नंदी के दर्शन में रखें खास ध्यान

शिव मंदिर में पहुंचने के बाद परिक्रमा को लेकर भी कई भक्तों को सही जानकारी नहीं होती। प्रचलित परंपरा के अनुसार शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जलहरी से निकलने वाले अभिषेक जल को लांघने से बचा जाता है और कई जगह आधी परिक्रमा करने की परंपरा है। हालांकि मंदिर की बनावट और स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए वहां की व्यवस्था का पालन करना चाहिए। इसके अलावा शिवलिंग के सामने नंदी की प्रतिमा होती है। धार्मिक मान्यता में नंदी को भगवान शिव का वाहन और परम भक्त माना जाता है। ऐसे में नंदी और शिवलिंग के बीच खड़े होकर लंबे समय तक दर्शन करने या वहां से बार-बार गुजरने से बचना चाहिए। पहले नंदी को प्रणाम करके एक ओर से शिवलिंग के दर्शन करना बेहतर माना जाता है। भीड़ के बीच फोटो या वीडियो बनाने के लिए रुकने से दूसरे श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है।

पूजा के बाद मंदिर गंदा छोड़ना भी बड़ी गलती

सावन सोमवार पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में पूजा के बाद प्लास्टिक की थैली, दूध के पैकेट, फूलों की पन्नी और अगरबत्ती के रैपर इधर-उधर छोड़ना मंदिर की स्वच्छता को प्रभावित करता है। पूजा सामग्री को मंदिर की ओर से बनाए गए निर्धारित स्थान पर ही डालना चाहिए और प्लास्टिक को कूड़ेदान में रखना चाहिए। अभिषेक का जल जिस रास्ते से बाहर निकलता है, उसे भी लांघने से बचना चाहिए। 10 अगस्त को शिव मंदिर जाते समय श्रद्धालु स्वच्छ जल, बेलपत्र और अपनी श्रद्धा के साथ पूजा कर सकते हैं। पूजा में किसी छोटी अनजानी गलती को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को सरल भाव से प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है। इसलिए पूजा का असली उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि मन को शांत करना, अच्छी सोच रखना और अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। स्थानीय मंदिर की परंपरा और पुजारी के निर्देश को प्राथमिकता देना सबसे उचित रहेगा।

Read more-ममता बनर्जी की कार पर हमले के बाद BJP ने तोड़ी चुप्पी, सामने आया पहला बड़ा बयान

Exit mobile version