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Indira Ekadashi 2026: तुलसी पूजा में एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी? जानें पूजा की सही विधि और थाली में क्या रखें

Indira Ekadashi 2026: 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। जानें तुलसी पूजा का महत्व, पूजा की थाली में क्या रखें और किन नियमों का ध्यान रखें।

Indira Ekadashi 2026

Indira Ekadashi 2026: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। साल 2026 में यह व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ पितरों के लिए भी प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा से इंदिरा एकादशी का व्रत और पूजा करने से पितरों की शांति के लिए पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी पूजा को विशेष स्थान दिया जाता है।

तुलसी के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है विष्णु पूजा?

धार्मिक परंपरा में तुलसी को भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। इसलिए इंदिरा एकादशी पर विष्णु पूजा करते समय तुलसीदल अर्पित करने की परंपरा है। भक्त तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा भी करते हैं। हालांकि, यहां एक जरूरी नियम का ध्यान रखना चाहिए। एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ना वर्जित माना जाता है। इसलिए अगर पूजा में तुलसीदल चढ़ाना है तो इसे दशमी तिथि यानी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तरह पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा और पितरों की शांति की कामना की जाती है।

पूजा की थाली में रखें ये जरूरी सामग्री

इंदिरा एकादशी की पूजा के लिए थाली तैयार करते समय कुछ सामान्य पूजा सामग्री पहले से रखी जा सकती है। इसमें भगवान विष्णु का चित्र या शालिग्राम, पीले फूल, पहले से रखे गए तुलसीदल और अक्षत शामिल हैं। इसके अलावा पीला चंदन या गोपीचंदन, गंगाजल और पंचामृत भी रखा जा सकता है। पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा में भगवान को भोग लगाने के लिए केला, अन्य पीले फल, मिठाई या पंजीरी रख सकते हैं। साथ में घी का दीपक और धूप भी पूजा की थाली का हिस्सा हो सकते हैं।

पूजा से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान

इंदिरा एकादशी पर पूजा करते समय सामग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धा और नियमों का पालन माना जाता है। पूजा के लिए साफ स्थान पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और विधि के अनुसार दीपक, धूप, चंदन, फूल, तुलसीदल और भोग अर्पित करें। अगर व्रत कथा याद नहीं है तो इंदिरा एकादशी की कथा की पुस्तक या उसका पाठ किया जा सकता है। साथ ही पूजा में इस्तेमाल होने वाली तुलसी पहले ही तोड़कर रख लें। इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में पड़ती है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि ये धार्मिक मान्यताएं हैं; इनके फल को आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

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