Diwali 2026: दिवाली आते ही घरों की सजावट शुरू हो जाती है। लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर रंग-बिरंगी रंगोली बनाते हैं और रोली या सिंदूर से स्वस्तिक का निशान भी बनाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर दिवाली पर इन दोनों शुभ चिह्नों को बनाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है? दरअसल, हिंदू धर्म में रंगोली और स्वस्तिक को केवल सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इन शुभ चिह्नों से मां लक्ष्मी के स्वागत का भाव प्रकट होता है। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी खास धार्मिक मान्यताएं।
रंगोली बनाने की परंपरा का क्या है इतिहास?
रंगोली शब्द को संस्कृत के ‘रंगावली’ शब्द से जुड़ा माना जाता है, जिसका अर्थ रंगों की सुंदर सजावट है। पुराने समय से ही त्योहारों और शुभ अवसरों पर घर के आंगन में रंगोली बनाने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ और सुंदर स्थानों पर निवास करती हैं। इसी वजह से दिवाली पर घर के मुख्य द्वार को साफ करके वहां रंगोली बनाई जाती है। इसे देवी लक्ष्मी के स्वागत और घर में खुशहाली की कामना का प्रतीक माना जाता है।
रंगोली से जुड़ी है सकारात्मकता की मान्यता
दिवाली पर रंगोली बनाने का महत्व केवल घर की सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। मान्यता है कि रंग-बिरंगे फूलों और आकृतियों से सजी रंगोली घर के वातावरण को शुभ बनाती है। कई परिवारों में इसे नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। रंगोली बनाने में परिवार के सभी सदस्य हिस्सा लेते हैं, जिससे त्योहार की खुशियां बढ़ती हैं और आपसी प्रेम भी मजबूत होता है। यही वजह है कि आज भी आधुनिक सजावट के दौर में रंगोली की परंपरा कायम है।
स्वस्तिक को क्यों माना जाता है बेहद शुभ?
स्वस्तिक हिंदू धर्म के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण शुभ चिह्नों में से एक है। इसे कल्याण, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वस्तिक का संबंध भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की कृपा से भी जोड़ा जाता है। दिवाली के अवसर पर लोग घर के मुख्य दरवाजे, पूजा स्थल और तिजोरी के पास रोली या सिंदूर से स्वस्तिक बनाते हैं। ऐसा करना शुभ कार्यों की शुरुआत और परिवार की सुख-शांति की कामना का प्रतीक माना जाता है।
रंगोली और स्वस्तिक से जुड़ा है मां लक्ष्मी के स्वागत का भाव
दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा से पहले घर के प्रवेश द्वार को सजाने की परंपरा है। कहीं फूलों की रंगोली बनाई जाती है तो कहीं चावल के आटे और प्राकृतिक रंगों से सुंदर आकृतियां तैयार की जाती हैं। वहीं दरवाजे पर स्वस्तिक बनाकर दीपक जलाए जाते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इन शुभ प्रतीकों से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी दिवाली की पहचान बनी हुई है।
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