संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को Lok Sabha में उस समय माहौल बेहद गरमा गया, जब स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। विपक्षी दलों ने स्पीकर के कामकाज को लेकर सवाल उठाए और प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। हालांकि दिन भर चले हंगामे और तीखी बहस के बाद यह प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा और नारेबाजी देखने को मिली, जिससे कार्यवाही प्रभावित होती रही।
गृहमंत्री Amit Shah के बयान पर बढ़ा विवाद
सदन में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने संबोधन में चीन के साथ सीमा विवाद और पूर्व की सरकारों की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कई ऐतिहासिक घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय चीन ने बड़ा इलाका अपने कब्जे में कर लिया था। शाह के इस बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि चेयर पर बैठे सांसदों को बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
राहुल गांधी को लेकर भी हुई तीखी टिप्पणी
बहस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने विपक्ष के नेता Rahul Gandhi को लेकर भी टिप्पणी की, जिससे विवाद और बढ़ गया। शाह ने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है और किसी भी नेता को दूसरे पर आरोप लगाने से पहले अपने व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की संसदीय उपस्थिति को लेकर भी आंकड़े पेश किए और कहा कि पिछले कई कार्यकालों में उनकी उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही है। इस पर कांग्रेस के कई सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में जोरदार हंगामा होने लगा। कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सदन में विपक्ष के नेता को निशाना बनाया जा रहा है।
हंगामे के बीच प्रस्ताव हुआ खारिज
लगातार शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच आखिरकार स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद के इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरी राजनीतिक खाई को उजागर कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बजट सत्र के दौरान ऐसे मुद्दों को लेकर बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव खारिज होने के बाद सरकार ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बताया है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी असहमति जारी रखने की बात कर रहा है।
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