पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बड़े विवाद की वजह से सुर्खियों में है। हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सौरव गांगुली के जरिए टीएमसी सांसद यूसुफ पठान को बहरामपुर लोकसभा सीट छोड़ने का संदेश भिजवाया था। इस रिपोर्ट के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। दावा किया गया कि इस कथित प्रस्ताव के पीछे ममता बनर्जी की दिल्ली राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की योजना भी जुड़ी हुई है। हालांकि, इस खबर ने कुछ ही घंटों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया और इसकी सत्यता पर सवाल उठने लगे।
सौरव गांगुली ने साफ किया अपना पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ममता बनर्जी ने उनसे कभी भी यूसुफ पठान को कोई संदेश पहुंचाने के लिए नहीं कहा। गांगुली ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक बातचीत या मध्यस्थता से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उन्होंने इस तरह का कोई संदेश आगे बढ़ाया है। उनके इस बयान के बाद मामले ने एक नया मोड़ ले लिया और मीडिया रिपोर्ट पर सवाल और गहरे हो गए। इससे साफ हुआ कि शुरुआती दावों में कई बातें बिना पुष्टि के प्रसारित की गई थीं।
यूसुफ पठान का वीडियो बयान और पूरी तरह से खंडन
इस पूरे विवाद पर खुद टीएमसी सांसद यूसुफ पठान ने वीडियो बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो किसी की ओर से कोई संदेश मिला और न ही उनसे बहरामपुर सीट छोड़ने या इस्तीफे की कोई बात की गई। यूसुफ पठान ने यह भी बताया कि उनकी आखिरी मुलाकात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हुई थी, लेकिन उसमें इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने साफ कहा कि यह खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है, जिसे बिना किसी पुष्टि के फैलाया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद यह मामला काफी हद तक शांत होता दिखा, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है।
टीएमसी के भीतर असंतोष की अटकलें
हालांकि इस विवाद के बीच टीएमसी के अंदरूनी हालात को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसदों और विधायकों के बीच असंतोष की स्थिति बन रही है और अलग गुट बनने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों में से कुछ के अलग रुख अपनाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हो रही है, वहीं राज्यसभा में भी 13 सांसदों के बीच मतभेद की बातें सामने आ रही हैं। दल-बदल कानून के कारण किसी भी बड़े बदलाव के लिए संख्या बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इस तरह की चर्चाएं और भी संवेदनशील मानी जा रही हैं। फिलहाल पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बंगाल की राजनीति में सस्पेंस लगातार बना हुआ है।
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