Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल और बढ़ गई जब शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने के बाद पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे पहली बार मीडिया के सामने आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिन नेताओं को जनता ने उनके नाम और भरोसे पर चुना था, वही आज पार्टी छोड़कर चले गए। उद्धव ठाकरे ने कहा, “शिवसैनिक आज भी मेरे साथ खड़े हैं, लेकिन जिन लोगों ने पार्टी छोड़ी है, उन्हें देखकर अब शर्म आती है कि वे कभी हमारे साथ थे।” उन्होंने दावा किया कि सांसद उनकी वजह से चुनाव जीते थे और आज वही लोग अलग राह पर चल पड़े हैं। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
सांसदों की बगावत पर उठाए सवाल
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जनता ने जिन नेताओं को चुना था, उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसद अब यह कह रहे हैं कि पार्टी में रहने का कोई फायदा नहीं था, जबकि चुनाव के समय उन्होंने पार्टी और नेतृत्व के नाम पर ही वोट मांगे थे। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कुछ नेताओं ने जनता के भरोसे को तोड़ा है। उद्धव ने किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज किसानों के भविष्य की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन कुछ नेता सिर्फ झूठे वादों और सत्ता की राजनीति में लगे हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जनता आने वाले समय में ऐसे नेताओं को जवाब जरूर देगी।
फडणवीस से मुलाकात पर भी दिया जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हाल ही में हुई मुलाकात को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी और आने वाले दिनों में उसके परिणाम सामने आएंगे। गौरतलब है कि शुक्रवार को मुंबई से नागपुर जाने वाली एक ही फ्लाइट में मुख्यमंत्री फडणवीस और उद्धव ठाकरे साथ यात्रा करते दिखाई दिए थे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और कुछ देर बातचीत भी की। इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) के कई वरिष्ठ नेता भी उसी विमान में मौजूद थे। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं, हालांकि दोनों पक्षों ने इसे सामान्य मुलाकात बताया।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ा सियासी संघर्ष
उधर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहले ही कह चुके हैं कि उनका “ऑपरेशन टाइगर” अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में शिवसेना (यूबीटी) के और नेता उनके साथ आ सकते हैं। हाल ही में पार्टी के कई सांसद शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं, जिससे उद्धव ठाकरे की राजनीतिक चुनौती और बढ़ गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में दल-बदल और सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है। वहीं उद्धव ठाकरे लगातार अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दे रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पार्टी की असली ताकत आज भी उनके साथ खड़ी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस राजनीतिक संकट का आगे क्या असर देखने को मिलेगा।
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