लोकसभा के बजट सत्र के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान अंतरराष्ट्रीय विवाद से जुड़े “एपस्टीन फाइल्स” का जिक्र कर दिया। राहुल गांधी मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, तेल की कीमतों और देश में एलपीजी की स्थिति को लेकर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी इस मामले से जोड़ते हुए सवाल उठाया।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सदन में मौजूद सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही मिनटों में सदन का माहौल काफी गरम हो गया और शोर-शराबा बढ़ने लगा। इस बीच कई सांसदों ने राहुल गांधी के बयान को गंभीर आरोप बताते हुए इसे रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
स्पीकर ओम बिरला को करना पड़ा हस्तक्षेप
सदन में बढ़ते हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सभी सांसदों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा का ध्यान रखने की अपील की। स्पीकर ने यह भी कहा कि संसद में किसी भी तरह का आरोप लगाने से पहले तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के बयान के बाद सत्ता पक्ष के कई सांसद अपनी सीट से खड़े होकर विरोध जताने लगे। कुछ सांसदों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताया। स्थिति ऐसी बन गई कि कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही प्रभावित हो गई। स्पीकर ने बार-बार सांसदों से शांत रहने और चर्चा को नियमों के तहत जारी रखने की अपील की।
क्या है एपस्टीन फाइल्स का मामला
दरअसल “एपस्टीन फाइल्स” का संबंध अमेरिकी कारोबारी जेफरी एपस्टीन से जुड़े विवाद से है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए कुछ दस्तावेजों और चर्चाओं में कई बड़े नामों का जिक्र होने का दावा किया गया था। इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने संसद में यह मुद्दा उठाया और सवाल किया कि अगर किसी भारतीय का नाम इस तरह के दस्तावेजों में आता है तो सरकार की प्रतिक्रिया क्या होगी।
हालांकि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वर्षों पहले जब वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे थे, तब एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान कई लोगों से मुलाकात हुई थी। उनका कहना है कि उस मुलाकात का किसी भी विवादित गतिविधि से कोई संबंध नहीं है और इस तरह के आरोप पूरी तरह गलत हैं।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद
लोकसभा में हुए इस विवाद के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और देश की ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष बिना ठोस आधार के आरोप लगाकर सदन का समय बर्बाद कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, तेल की कीमतों में उछाल और देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है। ऐसे में संसद में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है। फिलहाल यह मामला संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।
