दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण के विरोध में हुए प्रदर्शन को लेकर NDA के दलित नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अगर मांगें व्यवस्थित तरीके से सरकार के सामने रखी जाती हैं, तो बातचीत की जा सकती है। वहीं केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताते हुए इसे खत्म करने की मांग का विरोध किया। दोनों नेताओं के बयान के बाद आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
चिराग पासवान ने कहा- गलतफहमी से बढ़ सकती है नाराजगी
पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी समाज के एक बड़े हिस्से में नाराजगी पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांग अगर उचित तरीके से सरकार के सामने आती है तो उस पर बातचीत का रास्ता खुला है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण की पात्रता तय करने में जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व दिया जाए। इस पर चिराग पासवान ने कहा कि NDA सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए पहले ही 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कर चुकी है। तेजस्वी यादव के प्रदर्शन को समर्थन देने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी और कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर मुद्दे उठाना उनकी जिम्मेदारी है।
अठावले बोले- आरक्षण खत्म करने की मांग का कोई आधार नहीं
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण खत्म करने की मांग को सीधे तौर पर खारिज किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण संविधान से मिला अधिकार है और इसे समाप्त करने की मांग उचित नहीं है। अठावले ने कहा कि SC, ST और EWS समेत अलग-अलग वर्गों को आरक्षण व्यवस्था से लाभ मिल रहा है। उन्होंने जाति आधारित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई जगह ऐसी समस्याएं मौजूद हैं। उनके मुताबिक आरक्षण खत्म करने की बात करने वालों को पहले जातिगत भेदभाव की समस्या खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। इस तरह अठावले ने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में किसी तरह की समाप्ति के पक्ष में नहीं हैं।
बोधगया मंदिर समिति को लेकर भी अठावले ने उठाई मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अठावले ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए समिति में आठ बौद्ध ट्रस्टियों की व्यवस्था किए जाने की मांग की। साथ ही गया के जिलाधिकारी को पदेन अध्यक्ष बनाए रखने की बात कही। अठावले ने कहा कि उनकी मांग किसी दूसरे धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि बौद्ध धार्मिक स्थल का संचालन बौद्ध समुदाय द्वारा किए जाने से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा गया है और राज्यपाल से भी चर्चा की जाएगी। वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कुछ बौद्ध भिक्षुओं ने अपनी मांगों को लेकर पटना के गर्दनीबाग में पांच दिन की भूख हड़ताल करने की घोषणा की।
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