टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) में पिछले दिनों प्रशासन द्वारा शहर के सिविल लाइन रोड पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। जेसीबी मशीनों की मदद से फुटपाथ से कई छोटे दुकानों को हटाया गया, जिससे कई रोज़गार वाले लोगों की रोजी‑रोटी मुश्किल हो गई। जब इस बात की जानकारी वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) को लगी, तो वह बिना समय गंवाए सुबह अपने घर से सीधे उस सड़क पर पहुंच गईं। यहां उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों के रोजगार को छीनना गलत है। विरोध इतना तेज़ हुआ कि उन्होंने समर्थन दिखाने का अनोखा तरीका अपनाया — खुद पोहा‑जलेबी बेचने लगे।
प्रशासन की कार्रवाई और लोगों की नाराज़गी
सोमवार को नगर पालिका, तहसीलदार और एसडीएम की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस अभियान के तहत जेसीबी मशीनों से कई छोटे ठेले और दुकानें हटाईं गईं। इन दुकानदारों में मुख्यतया वे लोग शामिल थे जो सुबह‑सुबह सड़कों पर पोहा, जलेबी, चाट और चाय जैसे छोटे‑मोटे व्यवसाय करते थे। दुकानदारों का कहना था कि यही एकमात्र कमाई का साधन है। फुटपाथ हटने से उनकी आय काफी कम हो गई। आसपास के लोगों ने भी प्रशासन के इस कदम पर नाराज़गी जताई, लेकिन कोई सामने नहीं आया।
उसी दौरान उमा भारती को यह सब पता चला और उन्होंने तुरंत कार्रवाई का विरोध करने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि प्रशासन पहले दुकानदारों के लिए वैकल्पिक जगह दें, फिर अतिक्रमण हटाएं। उनके इस कदम ने स्थानीय लोगों में फिर से उम्मीद जगाई।
उमा भारती का विरोध और अनोखा समर्थन
अगले दिन, यानी मंगलवार सुबह, उमा भारती ने सिविल लाइन रोड पर अपने बंगले से निकलकर खुद विरोध स्थल पर पहुंचकर प्रशासन द्वारा हटाए गए स्थान पर गाड़ियां रोक दीं। उन्होंने न केवल दुकानदारों को वापस बुलाया बल्कि खुद एक हाथ ठेले पर बैठकर पोहा‑जलेबी बेचना शुरू कर दिया। जनता और दुकानदार दोनों देखते ही रह गए।
उमा भारती ने कहा कि वह इस बात के पक्ष में हैं कि शासन‑प्रशासन को गरीब और छोटे व्यवसायियों के हित को समझना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे लोगों के लिए कुछ ठोस समाधान निकालना जरूरी है, ताकि उन्हें अपने परिवार का पेट पालने में मुश्किल न हो। जनता ने उनके इस कदम को दिल से सराहा और उनके साथ खड़े हुए।
प्रशासन से क्या कहा और आगे क्या होगा
उमा भारती ने प्रशासन से अपील की कि पहले दुकानदारों के लिए शहर के अलग‑अलग हिस्सों में वैकल्पिक ठेलों या दुकानों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन पहले स्थान उपलब्ध कराए, तब वे खुद और दुकानदार दोनों मिलकर वहां काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह जिला प्रशासन से बात करेंगी और दुकानदारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।
स्थानीय लोगों ने समर्थन में कहा कि उमा भारती की बात सुनकर प्रशासन को एक नयी सोच अपनानी चाहिए। व्यापारियों का मानना है कि इस तरह अतिक्रमण हटाने के बजाय उनकी मदद करने से सभी का भला होगा। कहीं‑कहीं शिकायतें भी आई हैं कि बिना पहले सूचना दिए दुकानों को हटाया गया, जिससे उनका आजीविका प्रभावित हुई। यह मुद्दा अब प्रशासन और व्यापारियों के बीच एक बड़ा चर्चात्मक विषय बन गया है।
शहर के अन्य हिस्सों में भी व्यापारियों ने अपनी स्थिति पर विचार करने की जरूरत बताई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर प्रशासन जल्द ही नए फैसले की घोषणा कर सकता है और दुकानदारों को स्थायी स्थान देने पर भी विचार कर सकता है।
