सपा विधायक का विवादित बयान उस समय सुर्खियों में आ गया जब उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा—“पाकिस्तान के हर शहर में तिरंगा लहरा रहा होता, अगर राजनीतिक फैसले अलग होते।” उनके इस बयान ने यूपी में राजनीतिक माहौल अचानक गर्म कर दिया। विधायक ने कहा कि भारतीय सेना दुनिया की सबसे बहादुर सेनाओं में से एक है और उसने एक दिन में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। लेकिन इतने बड़े ऑपरेशन के बाद अमेरिका द्वारा युद्धविराम का ऐलान कर दिया गया, जिससे आगे की कार्रवाई रोकनी पड़ी। इस बयान ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है।
‘सेना मजबूत, सरकार कमजोर’ विधायक ने सरकार पर साधा निशाना
सपा विधायक का विवादित बयान का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा वह था, जब उन्होंने कहा—“हमारी सेना मजबूत है लेकिन सरकार कमजोर है।” उनका आरोप था कि भारत की सेना हर स्तर पर सक्षम है, लेकिन निर्णय लेने की शक्ति राजनीतिक नेतृत्व के पास होती है, जहां कमजोरी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने उस समय सख्त कदम उठाए होते तो हालात बिल्कुल अलग दिखते। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबावों के कारण भारत को रुकना पड़ा, जो देश की रणनीतिक दृढ़ता पर सवाल खड़ा करता है।
विपक्ष ने कहा सच, सत्ता पक्ष बोला भड़काऊ—सियासत में बढ़ा तनाव
सपा विधायक का विवादित बयान सामने आते ही राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी तेज़ हो गईं। सत्ताधारी दल के नेताओं ने उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि ऐसे शब्द भारत की विदेश नीति व सैन्य रणनीति को कमजोर दिखाते हैं। वहीं समाजवादी पार्टी ने अपने विधायक का बचाव करते हुए कहा कि उनका मकसद सेना की क्षमता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सुधार की ओर ध्यान दिलाना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान चुनावी मौसम में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
जनता की मिश्रित प्रतिक्रिया, उठे कई सवाल
सपा विधायक का विवादित बयान वायरल होने के बाद लोगों की राय भी बंट गई है। कुछ लोगों ने कहा कि विधायक ने वही बात कही जो जनता वर्षों से महसूस करती है—कि सेना को निर्णय लेने में राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, कुछ नागरिकों ने इस बयान को देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। सोशल मीडिया टिप्पणियों में लोग पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे बयान वास्तव में सुरक्षा नीतियों में सुधार की मांग के लिए हैं या सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने का तरीका। विवाद बढ़ते जाने के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि मुद्दा सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति दोनों से जुड़ा एक गंभीर सवाल बन चुका है।
