जन सुराज पार्टी के प्रमुख और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार के मुसलमानों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार, 13 सितंबर को पटना के सब्जीबाग इलाके में आयोजित अल्पसंख्यक सम्मेलन में उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए खुद आगे आने की अपील की। प्रशांत किशोर ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का पिछलग्गू बनने से समुदाय को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीति में अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व मिलने की जरूरत पर जोर दिया। सब्जीबाग बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से प्रशांत किशोर विधायक हैं।
उपचुनाव में समर्थन के लिए जताया आभार
सम्मेलन के दौरान प्रशांत किशोर ने हाल के बांकीपुर उपचुनाव में समर्थन देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब अल्पसंख्यकों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश होनी चाहिए, जिसमें उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। पीके ने इस बात को लेकर भी चिंता जताई कि सामाजिक वर्गों के लोग अक्सर अपने हितैषी होने का दावा करने वाले नेताओं के प्रभाव में आ जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दें और राजनीतिक फैसले सोच-समझकर लें। उनके बयान को बिहार की राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय की भूमिका और प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
RJD के पारंपरिक समर्थन के बीच जन सुराज की चर्चा
बिहार की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ जुड़ा माना जाता रहा है। हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव के बाद जन सुराज पार्टी को मुस्लिम बहुल इलाकों से मिले समर्थन की चर्चा हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह चुनाव जन सुराज पार्टी के लिए खास महत्व रखता था, क्योंकि इसी चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी ने पहली बार जीत दर्ज की। बांकीपुर सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत क्षेत्र रही है। इससे पहले यहां से बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन विधायक थे। उनके राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया।
अपनी हिस्सेदारी के लिए खुद संघर्ष करने की अपील
प्रशांत किशोर ने सम्मेलन में कहा कि बिहार के सभी सामाजिक वर्गों को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय से विशेष रूप से अपील की कि वह किसी राजनीतिक दल का पिछलग्गू बनने के बजाय राजनीति में अपनी उचित हिस्सेदारी हासिल करने के लिए खुद संघर्ष करे। पीके का कहना था कि समुदाय को अपने प्रतिनिधित्व की चिंता स्वयं करनी चाहिए। उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न राजनीतिक दल राज्य में अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, प्रशांत किशोर का यह संदेश जन सुराज की राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
