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रांची से जमशेदपुर तक जनता का ‘शॉक ट्रीटमेंट’, कहीं उड़ा गुलाल तो कहीं मातम; क्या ये नतीजे बदल देंगे झारखंड का मुख्यमंत्री?

झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में खलबली मचा दी है। रांची, हजारीबाग और मेदिनीनगर में भाजपा का डंका बजा है, तो गिरिडीह और मानगो में विपक्षी गठबंधन ने सेंधमारी की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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Jharkhand News: झारखंड के 9 नगर निगमों में से 8 के परिणाम घोषित हो चुके हैं। राजधानी रांची में भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोशनी खलखो ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए 1,57,669 वोट हासिल किए। रांची की यह जीत भाजपा के लिए संजीवनी की तरह है। वहीं, मेदिनीनगर में अरुणा शंकर और आदित्यपुर में संजय सरदार ने भाजपा का परचम लहराकर पार्टी की पकड़ को और मजबूत किया है। हालांकि, गिरिडीह और मानगो के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। गिरिडीह में झामुमो की प्रमिला मेहरा ने 38,091 वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की, जो यह बताता है कि झामुमो अब केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। इसी तरह मानगो नगर निगम में कांग्रेस की सुधा गुप्ता ने 42,022 वोट पाकर भाजपा को कड़ी शिकस्त दी है। हजारीबाग में अरविंद कुमार राणा और चास में भोलू पासवान ने भी अपनी जीत दर्ज कराकर स्थानीय राजनीति में नए समीकरण पेश किए हैं।

नगर परिषद और पंचायतों में निर्दलीयों और छोटे दलों का जलवा

नगर परिषद और नगर पंचायतों के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर जनता अब पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार के काम और छवि को देख रही है। रामगढ़ नगर परिषद में कांग्रेस की कुसुमलता ने 17,605 वोटों के साथ जीत का स्वाद चखा, जबकि लोहरदगा और गुमला में भाजपा समर्थित क्रमश: अनिल उरांव और शकुंतला उरांव ने अपनी सीट निकाली। सिमडेगा में ओलीभर लकड़ा ने अपनी पकड़ साबित की। दिलचस्प मुकाबला नगर पंचायतों में देखने को मिला, जहाँ लातेहार में भाजपा के महेश सिंह और डोमचांच में उमेश वर्मा ने जीत दर्ज की। वहीं खूंटी में रानी टूटी और बुंडू में जीतेंद्र उरांव ने बाजी मारकर क्षेत्रीय राजनीति के नए द्वार खोल दिए हैं। गढ़वा और चतरा जैसे इलाकों में स्थानीय चेहरों ने बड़ी पार्टियों के समीकरणों को पीछे छोड़ दिया है।

सियासी गलियारों में हलचल: क्या है इन नतीजों का बड़ा संदेश?

इन चुनाव परिणामों का गहराई से विश्लेषण करें तो पता चलता है कि झारखंड का शहरी मतदाता अब बहुत जागरूक हो चुका है। भाजपा ने भले ही सबसे अधिक सीटें जीती हों, लेकिन कांग्रेस और झामुमो का शहरी वोट बैंक में इजाफा होना भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकता है। विशेष रूप से मानगो और गिरिडीह जैसे बड़े निगमों में गठबंधन की जीत यह संकेत देती है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन नतीजों से यह भी साफ हो गया है कि जनता केवल नारों पर नहीं, बल्कि सड़क, बिजली और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर वोट दे रही है। अब सभी पार्टियों की नज़र उन क्षेत्रों पर है जहाँ वे मामूली अंतर से हारी हैं, ताकि आने वाले समय में अपनी कमियों को सुधारा जा सके।

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