लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के “कॉम्प्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री” वाले बयान के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान पर अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मंगलवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए राउत ने कहा कि राहुल गांधी के पास दुनिया भर से कई अहम और संवेदनशील जानकारियां आती रहती हैं। उनके मुताबिक राहुल गांधी जब कोई बड़ा बयान देते हैं तो उसके पीछे कुछ न कुछ आधार जरूर होता है। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राहुल गांधी के सवालों का सीधा जवाब देने से बचती है और बहस से दूर भागती है। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में बहस और तेज हो गई है।
संजय राउत का आरोप— सरकार सवालों से बच रही है
संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई ऐसी जानकारियां होती हैं जो आम लोगों तक नहीं पहुंचतीं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष जब सरकार से सवाल करता है तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। राउत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विपक्ष के सवालों का सामना करने के बजाय चर्चा से बचती नजर आती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है और अगर विपक्ष किसी मुद्दे पर सवाल उठा रहा है तो उस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। राउत ने यह भी कहा कि संसद में कई बार ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं जिन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए, लेकिन कई बार इन सवालों को टाल दिया जाता है।
ईरान-इजरायल युद्ध पर भी उठाए सवाल
संजय राउत ने अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। राउत के मुताबिक ऐसे हालात में सरकार को संसद में खुलकर चर्चा करनी चाहिए कि इन घटनाओं का भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि खासकर पेट्रोल-डीजल की कीमतें, ऊर्जा संकट और महंगाई जैसे मुद्दे सीधे जनता से जुड़े हुए हैं। अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं तो इनका असर भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए सरकार को इन विषयों पर देश के सामने अपनी स्पष्ट नीति रखनी चाहिए।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल
संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है, तब भारत की विदेश नीति और सरकार की रणनीति को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं। राउत ने पूछा कि अगर भारत शांति की बात करता है तो फिर वैश्विक घटनाओं पर स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर भारत के व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को संसद और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राउत के इन बयानों के बाद एक बार फिर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
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